एशियन गेम्स 2026, जापान के आइची-नागोया शहर में चल रहे हैं, और भारत के लिए निशानेबाजी (शूटिंग) में एक के बाद एक खुशखबरी आ रही है। सोमवार को भारत के दो युवा निशानेबाजों — हिमांशु धिल्लों और रुद्रांक्ष पाटिल — ने पुरुषों की 10 मीटर एयर राइफल स्पर्धा में क्रमशः रजत और कांस्य पदक जीतकर पूरे देश को गर्व से भर दिया। इसी दिन दोनों ने पार्थ माने के साथ मिलकर टीम स्पर्धा में भी रजत पदक अपने नाम किया — यानी एक ही दिन में तीन पदक।
हिमांशु धिल्लों: पहली ही एशियन गेम्स में कमाल
हिमांशु के लिए यह उनका पहला एशियन गेम्स था, और उन्होंने अपने डेब्यू को यादगार बना दिया। फाइनल में उन्होंने 252.4 अंक हासिल कर रजत पदक जीता, जबकि चीन के शेंग लीहाओ ने मामूली अंतर से स्वर्ण अपने नाम किया। यह जीत यूं ही नहीं आई — इसी साल की शुरुआत में हिमांशु नई दिल्ली में जूनियर पुरुष 10 मीटर एयर राइफल की एशियाई चैंपियनशिप भी जीत चुके हैं। यह दिखाता है कि निरंतर मेहनत और सही समय पर मिला अवसर किसी भी युवा खिलाड़ी को शिखर तक पहुंचा सकता है।
रुद्रांक्ष पाटिल: असफलता से विश्व चैंपियन तक का सफर
रुद्रांक्ष की कहानी सबसे ज्यादा प्रेरणा देती है। महाराष्ट्र के ठाणे में जन्मे रुद्रांक्ष सिर्फ 19 साल की उम्र में 2023 के हांगझोऊ एशियन गेम्स में एक शूट-ऑफ में मामूली अंतर से व्यक्तिगत पदक से चूक गए थे। लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी। इसके बाद उन्होंने 2022 में काहिरा में हुई विश्व चैंपियनशिप में व्यक्तिगत और टीम — दोनों स्पर्धाओं में स्वर्ण पदक जीता, जिससे वे अभिनव बिंद्रा के बाद निशानेबाजी में व्यक्तिगत विश्व खिताब जीतने वाले दूसरे भारतीय बन गए। उसी साल वे विश्व रैंकिंग में नंबर 1 भी रहे। अब 2026 एशियन गेम्स में कांस्य पदक जीतकर उन्होंने साबित कर दिया कि निरंतरता और धैर्य किसी भी असफलता से बड़े होते हैं।
अपने सफर के बारे में बात करते हुए रुद्रांक्ष ने एक बार बताया था कि कैसे उनकी पहली कोच ने उनमें छिपी प्रतिभा को पहचाना और उन्हें तराशा — और तभी से वे अपने कोच और माता-पिता द्वारा दिखाए गए रास्ते पर चलते हुए आगे बढ़ते गए।
जिंदगी के लिए सबक
हिमांशु और रुद्रांक्ष की कहानी हमें सिखाती है कि सफलता कभी एक रात में नहीं मिलती। असफलता के बाद भी डटे रहना, अपने गुरुओं और परिवार पर भरोसा रखना, और हर दिन थोड़ा बेहतर बनने की कोशिश करना — यही असली जीत का मंत्र है। जैसा कि इन दोनों निशानेबाजों ने दिखाया, निशाना कभी चूक भी जाए, तो भी लक्ष्य से नजर मत हटाओ — अगला मौका जरूर आएगा।

